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बांग्लादेश के PM तारिक रहमान के लिए शेख हसीना का प्रत्‍यर्पण कराना क्यों है मुश्किल? जानें कहां फंसा है पेंच

साल 2024 में बांग्लादेश में राजनीतिक संकट आया था, जिसके बाद शेख हसीना को भारत में शरण लेनी पड़ी थी, अब उनके प्रत्‍यर्पण मांग तारिक रहमान सरकार ने ने इंडिया के सामने रखी है, लेकिन ये मामला राजनीतिक या कूटनीतिक से ज्यादा न्यायिक है, जिसकी वजह से एक्सट्रैडिशन के फैसले को लेकर पेंच फंसा हुआ है.

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Sheikh Hasina Extradition: बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार ने पूर्व पीएम शेख हसीना के प्रत्यर्पण की अपनी मांग फिर से दोहराया है, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि ये मामला सिर्फ कूटनीतिक बातचीत से हल नहीं हो सकता. भारत के सीनियर अधिकारियों ने इशारा दिया है कि प्रत्यर्पण के किसी भी गुजारिश की जांच आखिरकार देश की न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही की जानी चाहिए.

आसान नहीं है प्रत्‍यर्पण का फैसला

अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय अदालतों को ये तय करना होगा कि शेख हसीना पर लगे आरोप भारतीय कानून के तहत अपराध की कैटेगरी में आते हैं या नहीं. इसलिए आखिरी फैसला पूरी तरह से राजनीतिक या कूटनीतिक न होकर न्यायिक होगा. साथ ही खबर है कि भारत इस सेंसेटिव मसले का हल खोजने के लिए बांग्लादेश सरकार के साथ बातचीत कर रहा है.

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भारत ने बांग्लादेश से क्या कहा है?

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि बांग्लादेश के एक्सट्रैडिशन रिक्वेस्ट की जांच तय प्रक्रियाओं के तहत की जा रही है. अधिकारियों ने ये भी बताया है कि ढाका ने 2013 में दोनों देशों के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि के तहत जरूरी कानूनी दस्तावेज सौंपे हैं. ये संधि उन लोगों को सौंपने का प्रावधान करती है जिन पर आरोप हैं, जिन्हें दोषी ठहराया गया है या जिन्हें अदालत की तरफ से सुनाई गई सजा काटनी है. इसमें यह भी बताया गया है कि प्रत्यर्पण के लायक अपराधों पर दूसरे देश के न्यायिक अधिकारियों की तरफ से विचार किया जाता है.

राजनीतिक अपराध से जुड़ी धारा

इस संधि में पॉलिटिकल नेचर वाले अपराधों को शामिल नहीं किया गया है, हालांकि कई गंभीर अपराधों को इस सुरक्षा दायरे से बाहर रखा गया है. इनमें हत्या, गैर-इरादतन हत्या, मारपीट, फायर आर्म्स का इस्तेमाल और हत्या के लिए उकसाना शामिल हैं. भारत का प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 भी एक न्यायिक प्रक्रिया तय करता है. एक जांच मजिस्ट्रेट ये देख सकता है कि क्या विदेशी देश ने प्रथम दृष्टया कोई मामला बनाया है. अगर पर्याप्त आधार मौजूद हैं, तो एक्सट्रैडिशन की सिफारिश की जा सकती है. नहीं तो, उस शख्स को बरी किया जा सकता है.

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शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी कैसे होगी मुमकिन?

अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुई राजनीतिक उथल-पुथल के बाद से शे हसीना भारत में ही हैं. खबरों के मुताबिक, उन्होंने संकेत दिया है कि वो दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटना चाहती हैं. अगर वो अपनी मर्जी से लौटती हैं, तो एक्सट्रैडिशन का सवाल बेमानी हो सकता है. इस बीच, उम्मीद है कि भारत ढाका के साथ कूटनीतिक बातचीत जारी रखेगा और साथ ही अपनी कानूनी प्रणाली को किसी भी औपचारिक प्रत्यर्पण कार्यवाही पर फैसला करने देगा.

First published on: Aug 16, 2026 10:31 AM

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About the Author

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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