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ऑस्ट्रेलिया में आग तो US में बाढ़… समंदर गर्म होने से भारत में भी दिखेगा असर; सबसे ज्यादा किसे होगा नुकसान?

मौसम विज्ञान के मॉडल्स से जो डेटा सामने आया है, उसके मुताबिक, मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के एक बहुत बड़े हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की संभावना है.

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दुनिया अभी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से संभल भी नहीं पाई थी कि जलवायु वैज्ञानिकों ने एक नई और भयानक चेतावनी जारी कर दी है. उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में एक बेहद शक्तिशाली ‘अल नीनो’ घटना आकार ले रही है. शुरुआती पूर्वानुमानों से संकेत मिल रहे हैं कि यह घटना न केवल आने वाले महीनों में बहुत अधिक मजबूत होगी, बल्कि साल 2027 तक सक्रिय रह सकती है. अगर ऐसा होता है, तो यह पूरी दुनिया में मौसम के चक्र को पूरी तरह से तहस-नहस कर देगी.

‘नॉर्थ अमेरिकन मल्टी-मॉडल एन्सेम्बल’ की ओर से नवंबर-दिसंबर-जनवरी 2027 के लिए जारी समुद्र की सतह के तापमान का पूर्वानुमान बेहद डरावनी तस्वीर पेश कर रहा है.

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महासागर में बन रहा है ‘सुपर अल नीनो’

मौसम विज्ञान के मॉडल्स से जो डेटा सामने आया है, उसके मुताबिक, मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के एक बहुत बड़े हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की संभावना है. चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ मॉडल्स तो तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से भी पार जाने का इशारा कर रहे हैं.

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अगर यह पूर्वानुमान सच साबित होता है, तो यह मानव इतिहास में अब तक का सबसे खतरनाक और मजबूत अल नीनो एपिसोड होगा.

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मजबूत अल नीनो की जलवायु वैज्ञानिक तब घोषणा करते हैं जब प्रशांत महासागर के ‘नीनो 3.4’ क्षेत्र का तापमान औसत से 1.5 डिग्री सेल्सियस से 1.9 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो जाता है. जब तापमान में यह बढ़ोतरी 2 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाती है, तो इसे ‘वेरी स्ट्रांग’ या ‘सुपर अल नीनो’ कहा जाता है.

क्लाइमेट एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार कई मॉडल्स से एक जैसे संकेत मिल रहे हैं, कि तापमान का यह आंकड़ा 2026 के आखिरी तक 2 डिग्री सेल्सियस पार कर सकता है. इसलिए इस पूर्वानुमान को हल्के में बिल्कुल नहीं लिया जा सकता.

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भारत के लिए क्या खतरा?

भारत के संदर्भ में ‘अल नीनो’ का इतिहास हमेशा से बेहद डरावना रहा है. इसका सीधा असर भारतीय मानसून पर पड़ता है. ऐतिहासिक रूप से अल नीनो का संबंध भारत में कमजोर मानसून और सामान्य से काफी कम बारिश से रहा है. दक्षिण एशिया में जब-जब मजबूत अल नीनो आया है, तब-तब देश को भयंकर सूखे और रिकॉर्ड तोड़ लू का सामना करना पड़ा है.

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मानसून में थोड़ी सी भी देरी या कमी सीधे तौर पर खेती और जल भंडारों को संकट में डाल देती है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो जाता है.

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यह संकट ऐसे समय में आ रहा है जब धरती पहले से ही लॉन्ग टर्म क्लाइमेट चेंज की वजह से अपने सबसे गर्म दौर से गुजर रही है. पहले से ही बढ़े हुए वैश्विक तापमान के ऊपर इतने बड़े ‘सुपर अल नीनो’ का आना मौसम के चरम को एक नए और विनाशकारी स्तर पर ले जाएगा.

वैश्विक स्तर पर मचेगी तबाही

सिर्फ भारत ही नहीं, इस अल नीनो के कारण ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों में भीषण आग का जोखिम बढ़ जाएगा. दूसरी ओर, पश्चिमी दक्षिण अमेरिका के देशों में प्रलयंकारी बाढ़ आएगी और प्रशांत महासागर का समुद्री इको सिस्टम पूरी तरह बाधित हो जाएगा.

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First published on: Jun 17, 2026 05:39 PM

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About the Author

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.

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