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कलाम के साथियों का कमाल! ISRO के दिग्गजों ने बनाया ऐसा रॉकेट, जो महज 24 घंटे के नोटिस पर होगा लॉन्च

इस रॉकेट को सूरत स्थित स्टार्टअप भारत स्पेस व्हीकल विकसित कर रहा है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी कोर टीम है, जिसमें इसरो के पूर्व वैज्ञानिकों का 70 से अधिक वर्षों का सामूहिक अनुभव शामिल है.

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भारत की प्राइवेट स्पेस रेस में एक नया और बेहद शक्तिशाली नाम जुड़ गया है – ‘अगस्त्य-1’. गुजरात के सूरत स्थित स्टार्टअप ‘भारत स्पेस व्हीकल’ (BSV) की ओर विकसित यह रॉकेट केवल तकनीक का नमूना नहीं, बल्कि इसरो (ISRO) के उन दिग्गजों के दशकों के अनुभव का निचोड़ है, जिन्होंने भारत को GSLV और PSLV जैसे महान रॉकेट दिए. जहां दुनिया भर की बड़ी स्पेस एजेंसियां हफ्तों की तैयारी के बाद लॉन्चिंग करती हैं, वहीं ‘अगस्त्य-1’ महज 24 घंटे के नोटिस पर अंतरिक्ष में उड़ान भरने का दम रखता है. लिक्विड फ्यूल तकनीक और ‘फ्लाई-व्हाट-यू-टेस्ट’ की अनूठी फिलॉसफी के साथ यह रॉकेट रक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है.

कौन बना रहा है ‘अगस्त्य-1’?

इस रॉकेट को सूरत स्थित स्टार्टअप भारत स्पेस व्हीकल (BSV) विकसित कर रहा है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी कोर टीम है, जिसमें इसरो (ISRO) के पूर्व वैज्ञानिकों का 70 से अधिक वर्षों का सामूहिक अनुभव शामिल है. टीम में पद्म डॉ. एन. वेदाचलम (LPSC के पूर्व निदेशक) और एस.वी. शर्मा जैसे दिग्गज शामिल हैं, जिन्होंने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के साथ काम किया है.

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लिक्विड फ्यूल इसे कैसे खास बनाता है?

आमतौर पर छोटे रॉकेट (जैसे ISRO का SSLV) सॉलिड फ्यूल का उपयोग करते हैं. लेकिन BSV ने LOX/RP-1 (लिक्विड ऑक्सीजन और केरोसिन) इंजन को चुना है. सॉलिड रॉकेट को लॉन्च से पहले टेस्ट नहीं किया जा सकता, एक बार जलने पर वे रुकते नहीं. लेकिन लिक्विड इंजन को लॉन्च से पहले ‘हॉट-फायर टेस्ट’ करके उनकी विश्वसनीयता जांची जा सकती है.

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’24 घंटे में लॉन्च’ का क्या मतलब है?

इस रॉकेट की डिजाइन ऐसी है कि इसे बहुत कम समय में तैयार किया जा सकता है. रक्षा और आपदा प्रबंधन के समय अक्सर तुरंत सैटेलाइट लॉन्च करने की जरूरत होती है. अगस्त्य-1 महज 24 घंटे के नोटिस पर उड़ान भरने के लिए तैयार हो सकता है.

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रॉकेट की क्षमता और कद

इस रॉकेट की ऊंचाई 28 मीटर है. इसकी पेलोड क्षमता की बात करें तो यह 500 किग्रा वजन को सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा (SSPO) में और 800 किग्रा को पृथ्वी की निचली कक्षा में ले जा सकता है.

First published on: Mar 29, 2026 11:18 PM

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About the Author

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.

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