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भारत में क्यों चमक रहा है सेकंड हैंड लग्जरी कारों का बाजार? समझें इस बिजनेस का पूरा सच

Pre Owned Luxury Cars India: जानिए भारत में क्यों बढ़ रही है पुरानी मर्सिडीज-बीएमडब्ल्यू की डिमांड, कैसे तय होती है कीमत और EVs का इस मार्केट पर क्या असर पड़ेगा. ऑटोबेस्ट एम्पेरियो के फाउंडर अवनीत सिंह कोहली से खास बातचीत

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भारत में लग्जरी कार चलाने का सपना अब सिर्फ नई गाड़ियों की शोरूम तक सीमित नहीं रहा. बीते कुछ वर्षों में प्री-ओन्ड यानी सेकंड हैंड लग्जरी कार बाजार (Pre-owned Luxury Car Market) में जबरदस्त उछाल देखा गया है. इंड‍िया यूज्‍ड लग्‍जरी कार मार्केट र‍िपोर्ट एंड फोरकास्‍ट की र‍िपोर्ट के अनुसार साल दर साल इस बाजार में 20 से 25 फीसदी का इजाफा देखा जा रहा है. जो ग्राहक पहले नई कॉम्पैक्ट SUV खरीदने का बजट रखते थे, वे अब उसी बजट में पुरानी मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू या ऑडी जैसी गाड़ियां चुन रहे हैं.

आखिर इस बाजार में इतना बड़ा बदलाव कैसे आया? गाड़ी की सोर्सिंग से लेकर क्वालिटी, प्राइजिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) और भविष्य के ट्रेंड्स पर हमने बात की Autobest Emperio के फाउंडर अवनीत सिंह कोहली से.

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असंगठित से संगठित (Organised) होता बाजार और ग्रोथ

पहले सेकंड हैंड लग्जरी कारों का बाजार पूरी तरह लोकल डीलरों और बिचौलियों के भरोसे था, जहां न गाड़ी की गारंटी होती थी और न ही पेपर्स की पारदर्शिता. अवनीत सिंह कोहली बताते हैं कि 2015 के बाद से यह सेगमेंट तेजी से ऑर्गेनाइज्ड होना शुरू हुआ. सर्टिफाइड वारंटी, 100 से ज्‍यादा क्वालिटी चेक और प्रॉपर पेपरवर्क ने ग्राहकों का भरोसा बढ़ाया.

साल 2012 में जब ऑटोबेस्ट ने शुरुआत की थी, तब वे पूरे साल में बमुश्किल 100 कारें बेच पाते थे. लेकिन आज यह मांग इतनी बढ़ चुकी है कि कंपनी हर महीने 40 से 50 यूनिट्स आसानी से डिलीवर कर रही है.

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गाड़ियां कहां से आती हैं और प्राइजिंग कैसे तय होती है?
ग्राहक के मन में सबसे बड़ा सवाल होता है कि पुरानी लग्जरी कारें आती कहां से हैं और उनकी सही कीमत कैसे तय की जाती है?

सोर्सिंग का तरीका :

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एक्सचेंज कार्स (Exchange Cars): जब कोई ग्राहक नए लग्जरी शोरूम में पुरानी कार देकर नई गाड़ी लेता है, तो वे अधिकृत शोरूम पुरानी गाड़ियां ऑटोबेस्ट जैसे बड़े डीलर्स को दे देते हैं.

डायरेक्ट कस्टमर रीचआउट: कई ग्राहक अपनी कार सीधे डीलर्स को बेचना पसंद करते हैं.

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डेमो कार्स (Demo Cars): कंपनियों के पास टेस्टिंग या डिस्प्ले के लिए इस्तेमाल हुई कम चली (Less-driven) गाड़ियां भी डीलर्स के पास आती हैं.

कीमत तय करने का गणित:
किसी भी सेकंड हैंड लग्जरी कार की कीमत सिर्फ उसकी उम्र या किलोमीटर से तय नहीं होती. इसके लिए डिमांड और सप्लाई के गणित को देखा जाता है. साथ ही यह भी ध्यान रखा जाता है कि उस सेम मॉडल की नई कार पर कंपनी कितना डिस्काउंट दे रही है. अगर नई कार पर भारी छूट है, तो पुरानी कार की कीमत भी उसी अनुपात में कम तय होती है.

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इलेक्ट्रिक कारें (EVs) और CBU मॉडल्स लाएंगे बड़ा बूम
प्री-ओन्ड मार्केट में टेक्नोलॉजी और नए फ्यूल ऑप्शन का असर बहुत तेजी से दिख रहा है. अवनीत कोहली के मुताबिक, इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) ने लग्जरी कार सेल्स को एक नया बूम दिया है. उनका अनुमान है कि अगले 1 से 2 सालों में EVs के कारण इस बिजनेस की ओवरऑल सेल्स में 50 फीसदी का इजाफा होगा.

CBU (सीधे विदेश से इंपोर्ट होकर आने वाली गाड़ियां) तक पहले बहुत कम ग्राहकों की पहुंच होती थी. लेकिन आने वाले समय में सेकंड हैंड मार्केट के जरिए CBU कारों तक आम लग्जरी बायर्स की रीच काफी बढ़ जाएगी.

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Tier-2 और Tier-3 शहरों का रोल
आने वाले 3 से 5 सालों में प्री-ओन्ड लग्जरी कार मार्केट मेट्रो शहरों (दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु) से निकलकर Tier-2 और Tier-3 शहरों की तरफ रुख कर रहा है.

जयपुर, चंडीगढ़, इंदौर, लखनऊ और अहमदाबाद जैसे शहरों में युवा उद्यमियों और प्रोफेशनल्स की एस्पिरेशनल डिमांड (Aspirational Demand) बढ़ रही है. पारदर्शिता, डिजिटल इंस्पेक्शन रिपोर्ट्स और डोरस्टेप डिलीवरी जैसी सुविधाओं के कारण अब छोटे शहरों के खरीदार भी बिना किसी झिझक के प्री-ओन्ड लग्जरी कारें अपना रहे हैं.

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भारत का प्री-ओन्ड लग्जरी कार बाजार अब सिर्फ इस्तेमाल की हुई गाड़ियां बेचने का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह एक व्यवस्थित, पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इंडस्ट्री बन चुका है. अगर आप भी अपने लग्जरी कार के सपने को कम बजट में पूरा करना चाहते हैं, तो संगठित डीलर्स और प्रॉपर इंस्पेक्शन के जरिए एक बेहतरीन डील हासिल कर सकते हैं.

First published on: Sep 08, 2026 01:36 PM

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About the Author

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.

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