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‘अब नहीं होंगे सेकंड क्लास यात्री…’, SC ने रेलवे से शब्दावली चेंज करने को क्यों कहा?

Supreme Court Railway Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे में 'सेकंड क्लास यात्री' शब्द के इस्तेमाल पर सख्त आपत्ति जताई है. अदालत ने कहा कि सामाजिक संदर्भों में किसी व्यक्ति को इस नाम से बुलाना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने रेलवे में स्टाफ बढ़ाने और सुरक्षा पुख्ता करने के भी निर्देश दिए.

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Supreme Court Railway Verdict : सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रेलवे में इस्तेमाल की जाने वाली शब्दावली और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक अहम टिप्पणी की है. अदालत ने स्पष्ट कहा है कि किसी व्यक्ति को “सेकंड क्लास यात्री” कहना भारत के सामाजिक संदर्भ में असंवैधानिक और उसकी गरिमा के विपरीत है. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने रेलवे के आधिकारिक दस्तावेजों और बोलचाल में इस शब्द के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को उसकी यात्रा श्रेणी के आधार पर ‘सेकंड क्लास’ नहीं कहा जा सकता. अदालत ने निर्देश दिया कि इस शब्दावली का उपयोग केवल ट्रेन के डिब्बों या कोचों के संदर्भ में किया जाना चाहिए, न कि यात्रियों के लिए.

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MP हाईकोर्ट का फैसला पलटा, मिलेगा 8 लाख मुआवजा

मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल के फैसले को खारिज कर दिया। मामला साल 2015 का है, जब चंद्रकांत ठक्कर नाम के व्यक्ति की चलती ट्रेन से गिरने के कारण मौत हो गई थी। ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट ने सिर्फ इस आधार पर मुआवजा देने से मना कर दिया था कि मृतक के पास से ट्रेन का टिकट बरामद नहीं हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हादसों के दौरान सामान या टिकट खो जाना स्वाभाविक है। केवल टिकट न मिलने से किसी वैध यात्री का दर्जा खत्म नहीं होता। कोर्ट ने मृतक की पत्नी के हलफनामे को पर्याप्त माना और रेलवे को निर्देश दिया कि पीड़ित पत्नी को 8 लाख रुपये का मुआवजा ब्याज सहित दिया जाए।

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रेलवे में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की जरूरत

सुनवाई के दौरान पीठ ने रेलवे सुरक्षा और यात्री सुविधाओं पर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए. सर्वोच्च अदालत ने कहा कि रेलवे मैन्युअल और सुरक्षा नियमों को जमीनी स्तर पर सही तरीके से लागू करने के लिए स्टाफ की संख्या बढ़ाना बेहद जरूरी है. अदालत ने कहा कि रेलवे के आधुनिकीकरण के दौर में खाली पदों को भरकर युवाओं को रोजगार दिया जाना चाहिए. इससे न केवल युवाओं को स्थायी आजीविका मिलेगी, बल्कि रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी और हादसों को रोककर यात्रियों की जान बचाई जा सकेगी.

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First published on: Jul 17, 2026 04:40 PM

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About the Author

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.

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