Relief For Rahul Gandhi From Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को राहुल गांधी की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट की उस कार्यवाही को चुनौती दी है जिसमें उनके खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के आरोपों पर सीबीआई और ईडी जांच की मांग की गई थी.
3 हफ्ते का मिला वक्त
ये सुनवाई CJI सूर्यकांत की बेंच ने की, सुप्रीम कोर्ट ने प्लीडिंग पूरी करने के लिए 3 हफ्ते का वक्त दिया. इस दौरान दोनों पक्ष अपने-अपने लिखित दस्तावेज, जैसे याचिका, जवाब और यदि हो तो रीज्वॉइंडर-कोर्ट में निर्धारित समय-सीमा के भीतर दाखिल करेंगे. ये मामला 3 हफ्ते बाद सूचीबद्ध किया जायेगा और इस दौरान मौजूदा अंतरिम आदेश जारी रहेगा. सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले हाईकोर्ट की कार्यवाही को स्थगित रखते हुए CBI/ED को रिपोर्ट जमा करने से रोक दिया था.
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क्या है पूरा मामला?
इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरोपों की जांच के निर्देश दिए थे. ये मामला कर्नाटक के बीजेपी कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर की शिकायत से शुरू हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि गांधी के पास उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं ज्यादा संपत्ति है. मई 2026 में दिए गए एक आदेश में, हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि अगर शिकायत मिली है, तो आरोपों की जांच कानून के अनुसार की जानी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि ऐसी जांच के नतीजों के आधार पर CBI या ED कानून के तहत जरूरी कदम उठा सकती हैं. हाईकोर्ट ने एजेंसियों को इस मामले में हुए प्रोग्रेस के बारे में जानकारी देने का भी निर्देश दिया.
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राहुल गांधी के पास आय से अधिक संपत्ति होने के आरोपों से जुड़े मामले में CBI की तरफ से दाखिल काउंटर एफिडेविट पर हाईकोर्ट ने असंतोष जताया था. कोर्ट ने कहा था कि एजेंसी का जवाब मामले में हुई प्रोग्रेस को क्लियर करने में नाकाम रहा. जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस बृज राज सिंह की डिवीजन बेंच ने CBI को निर्देश दिया था कि वो अपने जॉइंट डायरेक्टर या हेड ऑफ़ जोन, ACHQ जोन, नई दिल्ली के ज़रिए एक नया जवाब दाखिल करे, जिसमें जांच की प्रगति साफ तौर पर बताई गई हो. कोर्ट ने कहा था कि पहले दाखिल किए गए जवाब से यह समझना मुमकिन नहीं था कि मामले में क्या कदम उठाए गए हैं. कर्नाटक के बीजेपी कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर की याचिका में राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों पर कार्रवाई की मांग की गई थी. 2026 की शुरुआत में हाईकोर्ट ने CBI और ED को आरोपों की जांच करने और जांच की प्रोग्रेस की जानकारी कोर्ट के सामने रखने का निर्देश दिया था.