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Explainer: अमेरिका में H-1B वीजा रोकने का बिल पेश, भारतीयों पर क्या होगा असर?

Donald Trump Visa Policy: अमेरिका में भारतीयों के लिए बड़ा झटका! H-1B वीजा को 3 साल तक रोकने के लिए अमेरिकी कांग्रेस में नया बिल पेश. 2,00,000 रुपए की सैलरी और ग्रीन कार्ड पर पाबंदी जैसे कड़े नियमों ने बढ़ाई आईटी प्रोफेशनल्स की टेंशन. जानें आपकी नौकरी और भविष्य पर क्या होगा असर."

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Donald Trump Visa Policy : अमेरिका में नौकरी का सपना देखने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए एक बहुत ही बुरी खबर सामने आ रही है. अमेरिकी कांग्रेस में एरिज़ोना के सांसद एली क्रेन और उनके 7 साथियों ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसमें H-1B वीजा कार्यक्रम को अगले 3 साल के लिए पूरी तरह से निलंबित करने की मांग की गई है. एच-1बी वीजा कार्यक्रम के लिए यह नई बाधा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा नए आवेदनों पर 1,00,000 डॉलर का शुल्क लगाने की घोषणा के कुछ महीनों बाद सामने आई है. अगर यह बिल कानून बनता है, तो इसका सबसे बड़ा और सीधा असर भारतीय आईटी एक्सपर्ट्स और डॉक्टरों पर पड़ेगा.

क्या है इस नए बिल में

एच-1बी वीजा कार्यक्रम, जिसके माध्यम से अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियां भारतीय और अन्य विदेशी श्रमिकों को काम पर रखती हैं, डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार के तहत एक और बाधा का सामना कर रहा है, क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन सांसदों के एक समूह ने तीन साल के प्रतिबंध की मांग करने वाला एक विधेयक पेश किया है. विधेयक में चौंकाने वाले बदलाव सुझाए गए हैं:

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  • वीजा की संख्या में भारी कटौती: हर साल जारी होने वाले वीजा की सीमा को 65,000 से घटाकर सिर्फ 25,000 करने का प्रस्ताव है.
  • सैलरी का नया नियम: अब H-1B वीजा के लिए न्यूनतम वेतन 2,00,000 डॉलर (करीब 1.70 करोड़ रुपये) सालाना तय करने की बात कही गई है.
  • परिवार पर पाबंदी: वीजा धारक अब अपने आश्रितों (पत्नी/बच्चे) को अमेरिका नहीं ला पाएंगे.
  • ग्रीन कार्ड का रास्ता बंद: डरावनी बात यह है कि H-1B धारकों को स्थायी निवासी बनने से रोकने का भी प्रावधान है.

भारतीयों के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल?

अमेरिका में काम करने वाले विदेशी श्रमिकों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है. इस बिल के अनुसार, जो लोग पहले से वहां हैं, उन्हें अपनी वीजा कैटेगरी बदलनी होगी या देश छोड़ना होगा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो भारतीय 20 साल से ग्रीन कार्ड के इंतजार में हैं, उनके लिए यह बिल एक संवैधानिक संकट खड़ा कर सकता है.

भारतीयों पर क्या होगा असर?

अमेरिका में रहने वाले और वहां जाकर बसने का सपना देखने वाले भारतीयों के लिए मुश्किलों का दौर शुरू हो सकता है. अमेरिकी कांग्रेस में पेश किए गए नए विधेयक का सबसे गहरा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा. चू्ंकि अमेरिकी टेक कंपनियों में काम करने वाले विदेशी श्रमिकों में सबसे बड़ा हिस्सा भारतीयों का है, इसलिए इन बदलावों से भारत का आईटी और हेल्थकेयर सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.

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क्यों लिया जा रहा है यह कड़ा फैसला?

अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि कंपनियां सस्ते विदेशी कर्मचारियों को रखने के लिए अमेरिकी नागरिकों की छंटनी कर रही हैं. सांसद पॉल गोसर ने साफ शब्दों में कहा, “यह बिल उस व्यवस्था को रोकता है जो अमेरिकियों के खिलाफ है. अगर कंपनी किसी अमेरिकी को काम पर रख सकती है, तो उसे वही करना चाहिए.”
बता दें कि इससे कुछ समय पहले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नए आवेदनों पर 1,00,000 डॉलर का शुल्क लगाने की घोषणा की थी. ऐसे में यह नया विधेयक भारतीयों के ‘अमेरिकी सपने’ के लिए एक बड़ी दीवार साबित हो सकता है.

भारतीयों के लिए इस बिल के मायने:

यह बिल न केवल वीजा रोकने की बात करता है, बल्कि पूरी प्रक्रिया को बदलने का प्रस्ताव देता है:

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  • वेतन के आधार पर चयन: अब तक लॉटरी सिस्टम से भाग्य का फैसला होता था, लेकिन अब इसे बदलकर ‘सबसे ज्यादा वेतन’ पाने वालों को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है.
  • OPT प्रोग्राम पर खतरा: बिल में ‘ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग’ को खत्म करने की मांग की गई है. इसका मतलब है कि अमेरिकी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद भारतीय छात्र वहां इंटर्नशिप या नौकरी नहीं कर पाएंगे.
  • ग्रीन कार्ड का रास्ता बंद: एच-1बी वीजा को ‘अस्थायी’ बनाए रखने के लिए इसे स्थायी निवास में बदलने पर रोक लगाने की बात कही गई है.

क्या कानूनी रूप से बंद हो सकता है वीजा?

मशहूर इमीग्रेशन वकील राहुल रेड्डी के अनुसार, “सैद्धांतिक रूप से अमेरिका ऐसा कर सकता है. अमेरिकी कांग्रेस के पास किसी भी वीजा श्रेणी को रोकने का पूरा अधिकार है.” अगर यह बिल पास होता है, तो प्रशासन को इसे सख्ती से लागू करना होगा.

क्या होगा वर्तमान वीजा धारकों का?

अगर यह रोक लागू होती है, तो वर्तमान में अमेरिका में रह रहे हजारों भारतीयों को या तो तुरंत देश छोड़ना होगा या फिर अपनी वीजा स्थिति बदलकर छात्र वीजा जैसे विकल्पों को अपनाना होगा. सांसद एली क्रेन और उनके साथियों का कहना है कि यह कदम अमेरिकी नागरिकों को ‘सस्ते विदेशी श्रम’ से बचाने के लिए उठाया जा रहा है. क्रेन के अनुसार, संघीय सरकार को निगमों के मुनाफे के बजाय अपने नागरिकों के भविष्य के प्रति जवाबदेह होना चाहिए.

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First published on: Apr 25, 2026 05:15 PM

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About the Author

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.

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