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पृथ्वी पर 100 साल में पहली बार दिखेगा अनोखा दृश्य, 6 मिनट के लिए गायब हो जाएगी सूर्य की रोशनी! अचानक बढ़ेगी ठंड

सूरज के अचानक छिप जाने के कारण तापमान में लगभग 5 से 10 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हो सकती है. साथ ही, हवाओं की दिशा में बदलाव के अलावा पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के व्यवहार में भी असामान्य बातें देखने को मिल सकती हैं.

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Total Solar Eclipse: पृथ्वी पर 100 साल बाद एक बार फिर से अनोखी घटना-घटने जा रही है, जिसका असर दुनिया के कई हिस्सों में देखने को मिलेगा. अगर आप भी इस घटना के साक्षी बनना चाहते हैं तो करीब 2 साल और इंतजार करना पड़ेगा. वैज्ञानिकों की मानें तो 2 अगस्त 2027 को पृथ्वी पर ऐसा अनोखा खगोलीय नजारा देखने को मिलेगा, जो न केवल विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण होगा बल्कि आम लोगों के लिए भी काफी एक्साइटमेंट जैसा होगा. आपको बता दें कि इस दिन एक लंबा पूर्ण सूर्यग्रहण लगेगा, जो लगभग 6 मिनट 23 सेकेंड तक चलेगा.

क्या होगा इस दौरान?


इस ग्रहण के दौरान, चंद्रमा सूरज को पूरी तरह से ढक लेगा, जिससे दिन में अचानक गहरा अंधेरा छा जाएगा और तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा सकेगी. आपको बता दें पूर्ण सूर्य ग्रहण तब होता है जब चांद बिल्कुल सीध में सूर्य और पृथ्वी की बीच आ जाता है. ऐसा कई दशकों बाद ही होता है. खास बात यह है कि 2027 का यह सूर्यग्रहण बेहद लंबा और क्लियर होगा क्योंकि चांद उस समय पृथ्वी के सबसे निकट बिंदु पर होगा, जिसे पेरिजी कहते हैं.

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इन जगहों पर छा जाएगा घना अंधेरा


इस खगोलीय घटनाक्रम के चलते चांद का साया सीधे धरती पर लंबे समय तक के लिए टिका रहेगा. यह घटना तब और खास हो जाती है जब इस समय सूरज ‘डायमंड रिंग’ या ‘रिंग ऑफ फायर’ की तरह नजर आएगा. यह ग्रहण अटलांटिक महासागर से शुरू होगा और इसका पहला प्रभाव जिब्राल्टर स्ट्रेट के पास देखा जा सकेगा. वहीं दक्षिणी यूरोप, पूर्वोत्तर अफ्रीका और मध्य पूर्व के कई हिस्सों में कुछ समय के लिए अंधेरा छा जाएगा. स्पेन, मोरक्को, अल्जीरिया, ट्यूनिशिया, लीबिया, मिस्र और मध्य पूर्व के शहरों में इस प्राकृतिक चमत्कार को देखा जा सकेगा.

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क्या भारत में भी दिखेगा असर?


हालांकि भारतीयों को इस प्राकृतिक घटना का एहसास नहीं होगा क्योंकि सूर्य ग्रहण का असर भारत में नहीं दिखेगा. हालांकि कुछ सीमित हिस्सों में आंशिक सूर्यग्रहण देखा जा सकेगा. सूरज के अचानक छिप जाने के कारण तापमान में लगभग 5 से 10 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हो सकती है. साथ ही, हवाओं की दिशा में बदलाव के अलावा पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के व्यवहार में भी असामान्य बातें देखने को मिल सकती हैं. कई वैज्ञानिक इसे पृथ्वी और जीवों के लिए एक प्राकृतिक प्रयोग मानते हैं, जो प्रकृति की प्रतिक्रियाओं को समझने में मदद करेगा. वैज्ञानिकों और शोध संस्थानों ने इस घटना को लेकर तैयारी शुरू कर दी है.

First published on: Nov 25, 2025 11:50 PM

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About the Author

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक

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