चैन की नींद नहीं सो पाते तो फायदेमंद हो सकते हैं ये 5 टिप्स, आजमा कर देखिए

Tips For Sweet Sleep: गहरी और चैन की नींद किसे पसंद नहीं होती है। हर कोई चाहता है सुकून की नींद सोना। नींद अच्छी है तो इंसान तनाव मुक्त रहता है और नींद नहीं आ रही है तो इसका मतलब कोई न कोई तनाव जरूर है। आजकल की लाइफस्टाइल ही ऐसी है कि अच्छी नींद […]

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Tips For Sweet Sleep: गहरी और चैन की नींद किसे पसंद नहीं होती है। हर कोई चाहता है सुकून की नींद सोना। नींद अच्छी है तो इंसान तनाव मुक्त रहता है और नींद नहीं आ रही है तो इसका मतलब कोई न कोई तनाव जरूर है। आजकल की लाइफस्टाइल ही ऐसी है कि अच्छी नींद पाने के लिए इंसान को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। जिसे बिना किसी मशक्कत के अच्छी नींद आ रही हो, समझो वह बहुत भाग्यशाली पर्सन है।

हम चाहें तो अपने डेली रूटीन में छोटे-मोटे चेंजिंग लाकर स्वीट नींद ले सकते हैं। गहरी नींद में बॉडी रिलैक्स फील करती है और इसके अन्य फंक्शंस को अच्छे से काम करने के लिए इंटरनल सपोर्ट भी मिलता है। कुछ लोगों को बिस्तर पर जाते ही अच्छी नींद अपने आप आ जाती है।‌ वहीं कुछ लोगों को नहीं आती। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो नींद की समस्या बॉडी में कई सारी परेशानियों को पैदा कर सकती है। हम यहां कुछ टिप्स के बारे में जानकारी शेयर कर रहे हैं, जो अच्छी नींद लाने में हेल्प कर सकती है।

टाइम पर सोना, सुबह जल्दी उठना

अगर आप रात को टाइम पर सोने और सुबह जल्दी उठने को लेकर प्रतिबद्ध हैं तो यह मानकर चलिए कि आप लंबे समय तक न सिर्फ हेल्दी रहेंगे, बल्कि अच्छी नींद भी पाने जा रहे हैं। टाइमली लाइफस्टाइल वाले इंसान को नींद की समस्या बेहद मुश्किल से होती है। रात में जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठना हेल्दी हेल्थ का एक परफेक्ट उदाहरण है।

अल्कोहल के सेवन से बनाएं दूरी

कहा जाता है कि रात में 2 पैग अल्कोहल लेने से नींद और हार्मोन्स पर नेगेटिव असर पड़ सकता है। शराब के बारे में बताया गया है कि यह नींद के पैटर्न को ख़राब करने, स्लीप एप्निया को बढ़ाने और खर्राटे का भी एक कारण होता है। इसलिए हेल्दी स्लीप के लिए शराब से दूरी बनाकर रहना चाहिए। इसलिए कहा जाता है कि अवॉयड ड्रिंक।

योग और मेडिटेशन नहीं तो स्लीपिंग प्रॉब्लम

आज सारी दुनिया योग और मेडिटेशन को नैचुरल मेडिसिन के रूप में देख रही है। मेंटल स्ट्रेस और डिप्रेशन के कारण हमें हेल्दी स्लीपिंग के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन योग और मेडिटेशन की रेगुलर प्रैक्टिस काफी हद तक इस प्रॉब्लम से छुटकारा दिला सकता है। योग और मेडिटेशन से हमारे ब्रैथिंग प्रैक्टिस पैटर्न में हेल्प मिलती है। इसकी रेगुलर प्रैक्टिस स्ट्रेस को दूर करती है। इसके कारण हमें स्लीप प्रॉब्लम का सामना नहीं करना पड़ता है।

बेडरूम के माहौल को हेल्दी स्लीप के अनुकूल बनाना

लोगों का विश्वास है कि अगर बेडरूम का सेटअप और उसका एनवायरनमेंट ठीक ठाक है तो रात को नींद आने में सपोर्ट मिलता है। इन फैक्टर्स में रूम का टेंपरेचर, शोरगुल, एक्सटर्नल लाइट्स और फर्नीचर आदि का सही अरेंजमेंट शामिल होता है। बेडरूम का एनवायरनमेंट नींद के अनुकूल करने से, एक्सटर्नल हल्ले-गुल्ले की आवाज़ को बंद करने से, लाइट और आर्टिफिशियल लाइट्स के साथ अलार्म आदि को कंट्रोल करके बेडरूम को साफ-सुथरा रखने से बेडरूम का एनवायरनमेंट हेल्दी स्लीप के लिए बेहतर हो सकता है।

रात में सभी इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों से दूरी बनाएं

देर रात तक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का उपयोग करना नींद के लिए हार्मफुल हो सकता है। देर रात तक टीवी देखना, विडियो गेम खेलना, मोबाइल फोन पर घंटों चिपके रहना और सोशल मीडिया को देर रात तक यूज करने का शौक आपकी स्लीप के साथ-साथ आपके सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके अलावा कम्फ़र्टेबल बिस्तर जैसे तकिए और मैट्रेस यूज करने से भी स्वीट स्लीप आने में राहत मिलती है।

First published on: Sep 18, 2023 05:05 PM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.

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