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NCERT की नई किताब में ‘डांसिंग गर्ल’ की बदली तस्वीर पर विवाद, अब एनसीआरटी ने लिया यू-टर्न

अपनी नई क्लास 9 की आर्ट की किताब में सिंधु-सरस्वती सभ्यता की 'डांसिंग गर्ल' (नर्तकी) की तस्वीर को लेकर आलोचना झेलने के बाद, NCERT ने घोषणा की है कि इस तस्वीर को डिजिटल और भविष्य के प्रिंट एडिशन, दोनों में ही इसके मूल रूप में वापस लाया जाएगा.

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नेशनल काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने अपनी नई क्लास 9 की आर्ट की किताब ‘मधुरिमा’ में सिंधु-सरस्वती सभ्यता की मशहूर ‘डांसिंग गर्ल’ की तस्वीर को बदलने का फैसला किया है, क्योंकि इसके चित्रण को लेकर आलोचना हुई थी. ये फैसला 15 जून को NCERT के डायरेक्टर दिनेश सकलानी ने सुनाया. उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों से बातचीत के बाद तस्वीर को उसके मूल रूप में वापस लाया जाएगा.

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NCERT का बड़ा ऐलान

सकलानी ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि जैसे ही ये मामला सामने आया, संबंधित विभाग को इस पर ध्यान देने का निर्देश दिया गया. विशेषज्ञों से बातचीत के बाद, विभाग ‘डांसिंग गर्ल’ की तस्वीर को उसके असली रूप से बदल रहा है. पाठ्यपुस्तक के डिजिटल एडिशन में इस सुधार को तुरंत लागू किया जा रहा है, जबकि संशोधित प्रिंट एडिशन में तस्वीर का असली रूप होगा.

क्या है विवाद?

ये विवाद ‘हिस्ट्री ऑफ आर्ट’ चैप्टर 1 में दी गई कांसे की मूर्ति की एक तस्वीर को लेकर था. आलोचकों ने बताया कि ये तस्वीर असली मूर्ति से अलग दिख रही थी; इसमें कंधों के नीचे गहरे रंग की छाया के कारण मूर्ति के कुछ हिस्से छिप गए थे. कई इतिहासकारों, शिक्षकों और सोशल मीडिया यूजर्स का कहना था कि इस बदलाव से ऐसा लग रहा था जैसे मूर्ति ने कपड़े पहने हों. पाठ्यपुस्तक में इस मूर्ति को ‘लॉस्ट-वैक्स कास्टिंग’ तकनीक के उदाहरण के तौर पर बताया गया है. ये धातु पर काम करने का एक पारंपरिक तरीका है, जिसका इस्तेमाल आज भी पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में किया जाता है.

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क्यों चर्चा में आई ‘डांसिंग गर्ल’?

बदलाव की घोषणा करने से पहले, NCERT के अधिकारियों ने कहा था कि मामले को समीक्षा के लिए संबंधित विभाग को भेजा गया है. ये मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि वही कलाकृति कक्षा 6 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक ‘द बिगिनिंग ऑफ इंडियन सिविलाइजेशन’ में अपने मूल रूप में मौजूद है. दोनों पाठ्यपुस्तकों के प्रेजेंटेशन में अंतर को देखकर शिक्षाविदों और शिक्षा पर नजर रखने वालों ने सवाल उठाया कि ये बदलाव सिर्फ कक्षा 9 की कला की पाठ्यपुस्तक में ही क्यों किया गया. पाकिस्तान में मोहनजो-दरो से 1926 में मिली ये कांसे की मूर्ति लगभग 10.5 सेंटीमीटर ऊंची है और माना जाता है कि ये करीब 4,500 साल पुरानी है. इतिहासकार इसे सिंधु-सरस्वती सभ्यता की सबसे अहम कलाकृतियों में से एक और हड़प्पा के लोगों की बेहतरीन कारीगरी और कला परंपराओं का प्रतीक मानते हैं.

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First published on: Jun 15, 2026 09:57 PM

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About the Author

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.

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