6 वजहें, जो Israel-Hamas वार में कराएंगी अमेरिका-इरान की एंट्री, बनेंगे तीसरे विश्व युद्ध के हालात

Israel Hamas War Latest Update: अभी तो विध्वंसक दौर शुरू होगा। कहीं अमेरिका-इरान की एंट्री युद्ध को न ले जाए तीसरे विश्व युद्ध की ओर, आइए जानते हैं कि आखिर मामला क्या है?

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Israel Hamas War Latest Update: गाजा में भले ही इजराइल और हमास वीक ऑफ वाले मोड में हैं, लेकिन लेबनान बॉर्डर पर बारूदी कोहराम जारी है। युद्ध की भाषा में कहें तो नसरल्लाह के कमांडर बम वाला वीक एंड मना रहे हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का H वाला तीसरा संकट है हूती विद्रोही, जिसकी नजर बारूदी कोहराम से लेकर युद्ध विराम तक इजराइल पर टिकी है। हूती विद्रोही अपने मंसूबे का मिसाइल वाला ट्रेलर पहले भी पेश कर चुके हैं।

इजराइल की तमाम मुसीबतों के बीच सवाल है कि गाजा युद्ध में अब आगे क्या होने वाला है? क्या 48 घंटे बाद फिर से उत्तरी और दक्षिण गाजा में बम और मिसाइलों की ताबड़तोड़ बारिश होगी? इससे भी बड़ा सवाल क्या युद्ध विराम के बीच इजराइल को बर्बाद करने के लिए हानिया और नसरल्लाह के बीच डील हो चुकी है, क्या हानिया की तरफ से नसरल्लाह ब्रिगेड को यह इशारा मिला है कि गाजा में युद्ध विराम होगा, तुम लेबनान की तरफ से IDF पर हमले तेज करो? क्या हानिया ने नसरल्लाह को यह संकेत दे दिया है कि जब तक युद्ध विराम जारी है, इजराइल को धुआं-धुआं कर दो। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि हिज्बुल्लाह के बेस लेबनान और हमास के बीच सीक्रेट डील पर बड़ा खुलासा हुआ है।

 

अभी तो विध्वंसक दौर शुरू होना बाकी है

गाजा में सीजफायर खत्म होते ही हमास-इजराइल की जंग का सबसे विध्वंसक दौर शुरू हो सकता है, जिसमें सीधे तौर पर इजराइल से ईरान टकराएगा। अगर अमेरिका इस युद्ध में कूदा तो पूरा अरब सुलगने लगेगा। हालात ऐसे भी हो सकते हैं कि जंग, परमाणु युद्ध में बदल जाए, क्योंकि ईरान के न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर के पास एक जबरदस्त विस्फोट हुआ है। अगर यह विस्फोट न्यूक्लियर सेंटर पर होता तो ईरान में भारी तबाही मच सकती थी। इस विस्फोट के पीछे इजराइल या अमेरिका का हाथ बताया जा रहा है। क्या ईरान के न्यूक्लियर सेंटर के पास हुए धमाके के पीछे अमेरिका और इजराइल का हाथ है और अगर ऐसा है तो क्या अब जंग में ईरान की सीधे तौर पर एंट्री हो सकती है?

इजराइल को डर है कि सीजफायर खत्म होते ही ईरान हमला कर सकता है, इसलिए वह प्री-एम्टिव स्ट्राइक कर रहा है, जबकि अमेरिका को शक है कि ईरान धमकाने के बावजूद परमाणु हथियार बनाने में जुटा है। इसी वजह से अमेरिका उसे सबक सिखाना चाहता है। हालांकि ऐसी कई वजहें हैं, जो इस्फहान न्यूक्लियर सेंटर के पास विस्फोट होने के पीछे इजराइल का हाथ होने की तरफ इशारा करती हैं।

पहली वजह- गाजा युद्ध का अंत ईरान फिलिस्तीन की स्थापना से करना चाहता है
दूसरी वजह- ईरान का परमाणु कार्यक्रम इजराइल के लिए सबसे बड़ा खतरा है
तीसरी वजह- इजराइल को शक है कि 7 दिन में ईरान 3 परमाणु बम बना सकता है
चौथी वजह- यूएम एटॉमिक एजेंसी भी ईरान पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हुई है
5वीं वजह- सीजफायर के बाद ईरान युद्ध में हमास के साथ उतर सकता है

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इरान और अमेरिका आमने-सामने हो सकते

इजराइल यह बार-बार कहता रहा है कि हमास-हिज्बुल्लाह और हूती जैसे संगठनों के पीछे ईरान है। नहीं तो इन संगठनों की इतनी हिमाकत नहीं है, जो इजराइल पर हमला कर सके। इजराइल के चीफ ऑफ स्टाफ हेरजी हालेवी ने गाजा पर लगातार हमले की बात कही है। जाहिर है कि इससे ईरान जरूर भड़केगा, यानी हमास-इजराइल की बीच जंग का दूसरा चैप्टर सीजफायर के बाद शुरू हो सकता है, जिसमें जंग में सीधे तौर पर एक तरफ ईरान और उसके समर्थिक जिहादी ग्रुप होंगे, सामने अमेरिका और इजरायल होंगे। जो किसी भी कीमत पर ईरान को हावी नहीं होने देंगे। फिर चाहे ईरान में न्यूक्लियर विस्फोट ही क्यों न करना पड़े।

First published on: Nov 28, 2023 06:15 AM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.

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