---विज्ञापन---

Mala Jap Rules: माला जप करते समय तर्जनी उंगली का प्रयोग है ‘वर्जित’, जानें हिन्दू धर्म में माला जप के 4 नियम

Mala Jap Rules: हिन्दू धर्म में माला जप में तर्जनी उंगली का इस्तेमाल वर्जित माना गया है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं में इसे अहंकार और अधिकार भाव से जोड़ा जाता है. आइए जानते हैं, माला जप के जरूरी नियम क्या हैं?

---विज्ञापन---

Mala Jap Rules: हिन्दू धर्म ही नहीं बल्कि कई अन्य संस्कृतियों और धर्मों में भी माला जप सिर्फ मनके फेरने का काम नहीं है. इसे मन को शांत करने और ध्यान लगाने की साधना माना जाता है. लेकिन हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, माला का जप करते समय तर्जनी यानी इंडेक्स फिंगर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इसकी वजह ये है कि हाथ की तर्जनी उंगली को ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में अहंकार और अधिकार भाव से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए इसे माला से दूर रखने की परंपरा है. हम तर्जनी उंगली का इस्तेमाल निर्देश देने, चेतावनी देने या इशारा करने में करते हैं. आध्यात्मिक साधना में अहंकार से दूर रहना जरूरी माना गया है. आइए जानते हैं, किन उंगलियों से माला फेरनी चाहिए और जप के जरूरी नियम क्या हैं?

किन उंगलियों से फेरें माला?

मान्यता के अनुसार माला को अनामिका यानी रिंग फिंगर पर टिकाया जाता है. फिर मध्यमा यानी मिडिल फिंगर और अंगूठे की मदद से मनके आगे बढ़ाए जाते हैं. तर्जनी को अलग रखा जाता है. कुछ परंपराओं में माला को जमीन से न छूने देने की बात भी कही गई है. इसलिए जप में माला को सम्मान से रखना बेहतर माना जाता है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: Neem Karoli Baba: 53 साल से यहां सुरक्षित है नीम करोली बाबा का अस्थि कलश, फिल्म ‘हनुमान अंश’ के बाद सामने आई अनसुनी कहानी

माला जप के 4 जरूरी नियम

  1. सुमेरु मनका न लांघें – माला में आमतौर पर 108 मनके होते हैं. इनके साथ एक बड़ा मनका होता है, जिसे सुमेरु कहते हैं. जप में सुमेरु आने पर उसे पार नहीं किया जाता.
  2. सुमेरु के बाद माला पलटें – सुमेरु तक पहुंचने के बाद माला को वहीं से पलटकर दूसरी दिशा में जप शुरू करने की परंपरा है. सुमेरु को पार करना उचित नहीं माना जाता.
  3. गोमुखी का इस्तेमाल करें – कुछ साधना पद्धतियों में माला को गोमुखी यानी कपड़े की विशेष थैली में रखकर जप किया जाता है. इससे माला ढकी रहती है और एकाग्रता बनी रहती है.
  4. स्वच्छता और आसन का ध्यान रखें – जप से पहले हाथ-पैर धोकर साफ होकर बैठने की परंपरा है. पवित्र आसन पर बैठना बेहतर माना जाता है. माला को नाभि से ऊपर और हृदय के आसपास रखने की मान्यता भी मिलती है.

यह भी पढ़ें: Business Minded Zodiac Signs: नौकरी छोड़ खुद का ‘बिजनेस एम्पायर’ खड़ा करने का दम रखती हैं ये 2 राशियां, इनमें आप भी तो नहीं

---विज्ञापन---

जप का सही समय और दिशा

धार्मिक मान्यताओं में ब्रह्म मुहूर्त को मंत्र जप के लिए खास माना गया है. सुबह सूर्योदय से पहले का समय शांत होता है. जप करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठने की भी परंपरा है. हालांकि अलग-अलग मंत्र और साधना पद्धति में नियम बदल सकते हैं. इसलिए जिस परंपरा से मंत्र मिला हो, उसके नियमों को प्राथमिकता देना बेहतर है.

यह भी पढ़ें: Kitchen Vastu Tips: किचन में कभी खत्म न होने दें ये 3 चीजें, वरना शुरू हो सकते हैं कंगाली के दिन, जान लें बड़ा वास्तु नियम

---विज्ञापन---

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Sep 01, 2026 10:58 PM

End of Article

About the Author

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola