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Indian Citizenship: मुगलों के राज में भारतीय नागरिक होने का सबूत कैसे दिया जाता था? काफी चौंकाने वाला है जवाब

देश में पासपोर्ट को लेकर एक अलग ही बहस छिड़ी हुई है. हाल ही में जब से भारत सरकार ने कहा है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, यह केवल विदेश यात्रा करने का अधिकार पत्र है तब से ये मुद्दा गर्माया हुआ है. अब बड़ी संख्या में लोग सवाल उठा रहे हैं कि पासपोर्ट, आधार, वोटर कार्ड अलग-अलग उद्देश्यों के लिए बने हैं तो क्या यह सब गैर भारतीयों को भी दिए जाते हैं? अब दूसरी तरफ ये सवाल भी लोगों के बीच उठ रहे हैं कि आखिर मुगल काल में हिन्दुस्तानी नागरिकता का प्रमाण क्या होता था. उस जमाने में इस समस्या से निपटने के लिए क्या-क्या व्यवस्थाएं की गई थीं. तो चलिए जानते हैं.

First published on: Jun 27, 2026 03:10 PM

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Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.

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