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पुराने महलों में छोटे-छोटे झरोखे क्यों बनाए जाते थे? वजह जानकर बढ़ जाएगा इतिहास में आपका इंटरेस्ट

Small Windows Reasons In Mahal: पुराने महलों को देखते वक्त अगर आपने गौर किया होगा तो आगे बने छज्जे या झरोखे जरूर देखे होंगे. यह सिर्फ खूबसूरती का हिस्सा नहीं है, बल्कि इन्हें कई चीजें ध्यान में रखकर बनाया जाता था. इसके पीछे क्या कारण रहे हैं, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं. 

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Spiracle Reasons In Mahal: भारत एक ऐसा देश है जिसका इतिहास हजारों साल पुराना है. यहां सिर्फ इतिहास की किताबों में ही नहीं, बल्कि हर शहर, किले, मंदिर और महल में अतीत की झलक देखने को मिल जाती है. हर कदम पर आपको इतिहास के नमूने देखने को मिल जाएंगे. अगर आप कभी राजस्थान, मध्य प्रदेश या उत्तर भारत के किसी पुराने महल का दौरा किया हो तो वहां दीवारों या महलों की मीनारों पर बने छोटे-छोटे झरोखे जरूर देखे होंगे. ये झरोखे सिर्फ महलों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए नहीं बनाए जाते थे, बल्कि इनके पीछे कई वैज्ञानिक कारण भी रहे हैं. क्या आपको इसके पीछे का कारण पता है? अगर नहीं तो आइए इसके पीछे की असल वजह जानते हैं. 

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ठंडक बनाए रखने के लिए बनाना 

एयर कंडीशनर और कूलर के दौर से पहले महलों को ठंडा रखने के लिए खास वास्तु तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता था. छोटे-छोटे झरोखे हवा को कंट्रोल करते थे, जिससे गर्म हवा बाहर निकलती और ठंडी हवा अंदर आती थी. इससे महलों के अंदर के हिस्से बहुत ही ठंडे रहते थे.

राजघराने की महिलाओं के लिए बनाना 

पुराने समय में राजपरिवार की महिलाएं पर्दा प्रथा का पालन करती थीं. झरोखों को इस तरह से बनाया जाता था, जिससे अंदर बैठा इंसान बाहर का नजारा आसानी से देख सकता था, लेकिन बाहर खड़े लोगों को अंदर मौजूद इंसान दिखाई नहीं देता था. इससे महिलाएं धार्मिक जुलूस और दरबार की एक्टिविटी देख पाती थीं.

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सेफ्टी के लिहाज से भी थे अहम

झरोखों का इस्तेमाल महल की सेफ्टी में भी किया जाता था. सैनिक इन्हीं झरोखों से महल के बाहर होने वाली एक्टिविटी पर नजर रखते थे. खतरे में यह निगरानी का अहम रास्ता बन जाते थे. इससे महल पर होने वाले हमले से लोग आसानी से बाहर निकल जाते थे.

रोशनी का बेहतर इंतजाम

 महलों में नेचुरल रोशनी पहुंचाने के लिए भी झरोखे बनाए जाते थे. इनकी खास बनावट की वजह से तेज धूप सीधे अंदर नहीं आती थी, बल्कि छनकर आती थी. इससे कमरे उजले रहते थे और गर्मी भी कम महसूस होती थी. 

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वास्तुकला की खूबसूरती बढ़ाना 

राजस्थान, गुजरात और मुगलकालीन इमारतों में झरोखे वास्तुकला की पहचान माने जाते हैं. इन पर की गई बारीक नक्काशी महलों की शान बढ़ाती थी और राजाओं की कला प्रेम को दिखाने का काम करती है. इसके अलावा, झरोखे सिर्फ वास्तु तत्व नहीं थे, बल्कि उस समय की संस्कृति थे.  

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First published on: Aug 06, 2026 01:49 PM

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About the Author

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.

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