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छतरी का इतिहास है 4000 साल पुराना, कभी महिलाओं की खूबसूरती में लगाती थी चार चांद

छतरी बारिश में पानी से बचाने का काम करती है, लेकिन क्या आपको पता है कि पहले इसका इस्तेमाल सिर्फ शाही घरों में किया जाता था. यह धूप से बचाने और शाही अंदाज का एक हिस्सा थी. 

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बारिश में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीज छतरी है. यह हमें भीगने से बचाती है, जिसका इस्तेमाल धूप से बचने के लिए भी किया जा है. मगर क्या आप जानते हैं कि जिस छतरी को आज हम बारिश से बचने के लिए इस्तेमाल करते हैं, उसका इतिहास हजारों साल पुराना है. कहा जाता है कि 4000 साल पहले छतरी का शुरुआती रूप सामने आया था और उस समय इसका इस्तेमाल बारिश से ज्यादा तेज धूप से बचने के लिए किया जाता था. आइए इस लेख में इससे जुड़े कुछ फैक्ट्स जानते हैं, जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए. 

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धूप से बचने के लिए हुआ था इस्तेमाल

इतिहासकारों के मुताबिक प्राचीन मिस्र, चीन, ग्रीस और अस्सीरिया जैसी सभ्यताओं में छतरी या पैरासोल के शुरुआती रूप इस्तेमाल किए जाते थे. प्राचीन मिस्र में इसे खासतौर पर शाही परिवार के लोगों को धूप से बचाने के लिए इस्तेमाल किया करते थे. 

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कहां से आई छतरी? Image Credit- Freepik

पेड़ की शाखाओं से होता था तैयार 

आपको जानकर हैरानी होती है छाता को पैरासोल कहा जाता था. इसलिए क्योंकि इसे पैरासोल पत्तियों या पेड़ की शाखाओं से बनाया जाता था. इसके बाद में कपड़े या दूसरी सामग्रियों से बनाए जाने लगे. उस वक्त यह सिर्फ जरूरत की चीज नहीं थी, बल्कि रुतबे का प्रतीक भी थी. 

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महिलाओं की खूबसूरती से भी जुड़ है इतिहास 

समय के साथ पैरासोल सिर्फ धूप से बचने का साधन नहीं रहा. प्राचीन ग्रीस और बाद के यूरोपीय समाजों में यह महिलाओं के फैशन और सामाजिक पहचान का हिस्सा बन गया. खासतौर पर ग्रीस में पैरासोल को फैशनेबल महिलाओं के इस्तेमाल के लिए था. 

महिलाओं की पोशाक का हिस्सा 

बता दें कि दौर पैरासोल यानी छतरी महिलाओं की पोशाक का हिस्सा थी. इन्हें सुंदर कपड़ों और शाही डिजाइन के साथ तैयार किया जाता था. यह महिलाओं की खूबसूरती और फैशन को निखारने वाली एक्सेसरी भी बन चुकी थी. 

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चीन ने बदला छतरी का डिजाइन 

छतरी के इतिहास में चीन का बड़ा योगदान है. चीन में शुरुआती पैरासोल को बारिश से बचने के लिए वाटरप्रूफ बनाया गया. कागज या कपड़े पर मोम और लाह जैसी सामग्री का इस्तेमाल करके उसे पानी से बचाया जाने लगा. यहीं से छतरी का इस्तेमाल बारिश में होने लगा. 

फिर छतरी आम लोगों तक पहुंच गई 

समय के साथ छतरी शाही परिवारों और अमीरों की चीज से निकलकर आम लोगों तक पहुंच गई. इसको अलग अलग तरीकों से डिजाइन किया जाने लगा. अब तो आपको फोल्डिंग छाता भी आसानी से मिल जाएगा.

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First published on: Aug 10, 2026 04:45 PM

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About the Author

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.

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