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‘रूस पर 30 हजार से ज्यादा प्रतिबंध, फिर भी दुनिया से तेज रही हमारी आर्थिक ग्रोथ…’, ब्रिक्स बिजनेस फोरम में बोले राष्ट्रपति पुतिन

ब्रिक्स बिजनेस फोरम में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों पर कड़ा प्रहार किया. पुतिन ने कहा कि रूस पर 30,000 से अधिक प्रतिबंध लगाए गए, लेकिन इसके बावजूद रूस ने वैश्विक औसत से बेहतर आर्थिक विकास हासिल किया है. जानिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और पाइपलाइन हमलों पर क्या कहा.

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ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन को संबोधित करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही चुनौतियों पर खुलकर बात की. पुतिन ने वैश्विक प्रतिस्पर्धा के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि आजकल की होड़ काफी बदसूरत रूप ले चुकी है और यह सब सरकारी स्तर पर देखने को मिल रहा है.
अपने संबोधन में राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि कभी-कभी विरोध और प्रतिस्पर्धा शारीरिक नुकसान तक पहुंच जाती है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पाइपलाइनों को नष्ट किया जा रहा है, अंतरराष्ट्रीय ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को रोकने और समुद्री जहाजों को जब्त करने की कोशिशें की जा रही हैं. इसके अलावा कई अवैध पाबंदियां लगाई जा रही हैं और उन देशों को ‘सेकेंडरी प्रतिबंधों’ की धमकी दी जा रही है जो किसी और के इशारे पर चलने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हैं.

‘रूस पर लगे दुनिया के बाकी देशों से दोगुने प्रतिबंध’

पुतिन ने प्रतिबंधों के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अब तक रूस पर 30,000 से अधिक प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि यह संख्या दुनिया के बाकी सभी देशों पर मिलकर लगाए गए कुल प्रतिबंधों से भी दोगुनी है. रूस को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए हर संभव कदम उठाया गया. रूसी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि इन तमाम मुश्किल परिस्थितियों और दबाव के बावजूद रूस ने मजबूती से काम किया और बड़ी सफलता हासिल की है. पुतिन ने कहा, “हमने अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता को और मजबूत किया है. हम अपने भरोसेमंद और स्थिर साझेदारों के साथ रिश्ते लगातार बढ़ा रहे हैं.”

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उन्होंने आर्थिक आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान रूस की आर्थिक विकास दर दुनिया के औसत से भी बेहतर रही है, जो यह साबित करता है कि भारी पाबंदियों के बाद भी देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है.

पुराने लीडर्स की जगह अब नए देश बनेंगे ग्रोथ का इंजन

पुतिन ने अपने संबोधन में दुनिया की बदलती आर्थिक स्थिति पर एक बेहद अहम बात कही है. पुतिन ने साफ कहा कि इस समय पूरी दुनिया गहरे और बुनियादी बदलावों के दौर से गुजर रही है. दशकों तक दुनिया की अर्थव्यवस्था को चलाने वाले ताकतवर देश अब नए उभरते देशों से पीछे छूट रहे हैं. पुतिन ने कहा कि 20वीं सदी के दूसरे हिस्से में जिन देशों को आर्थिक तरक्की का अगुआ माना जाता था, अब उनकी जगह आर्थिक विकास के नए इंजन तैयार हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब वे ‘पुराने लीडर्स’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं, तो यह सिर्फ कहने का एक औपचारिक तरीका है, लेकिन हर कोई अच्छी तरह समझता है कि उनका इशारा किन देशों की तरफ है.

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पुराने देशों के पास ताकत है, लेकिन बदलाव तय है

रूसी राष्ट्रपति ने माना कि इन तथाकथित पुराने लीडर देशों के पास आज भी कई मजबूत पहलू मौजूद हैं. उनके पास बेहतरीन और मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर है, आधुनिक टेक्नोलॉजी का बड़ा फायदा है और लंबे समय से विकसित मजबूत वैज्ञानिक संस्थान व रिसर्च की व्यवस्था है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी स्थिति हमेशा एक जैसी नहीं रह सकती. पुतिन ने कहा कि दुनिया का हमेशा एक ही ढर्रे पर टिके रहना न तो इंसानी फितरत है और न ही अर्थव्यवस्था का नियम. अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए पुतिन ने रेखांकित किया कि दुनिया हमेशा बदलती रहती है और यही प्रकृति का नियम है. आर्थिक संतुलन में आ रहा यह गहरा और ऐतिहासिक बदलाव इसी स्वाभाविक प्रक्रिया का एक हिस्सा है, जिसे रोका नहीं जा सकता.

वैश्विक मंच पर दबाव की राजनीति नहीं चलेगी

पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि प्रतिबंधों और पाबंदियों के जरिए किसी देश की अर्थव्यवस्था को दबाने का दौर अब खत्म हो चुका है. ब्रिक्स देश आपसी सहयोग, मजबूत व्यापार और निष्पक्ष नीतियों के साथ आगे बढ़ रहे हैं. पश्चिमी देशों की तमाम कोशिशों के बावजूद ब्रिक्स देशों का आपसी तालमेल और आर्थिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है.

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First published on: Sep 11, 2026 06:40 PM

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About the Author

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.

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