Dharmasthala Rape and Murder Case: कर्नाटक के धर्मस्थल को पास उजिरे में 17 साल की लड़की के साथ रेप और उसकी हत्या का केस सुप्रीम कोर्ट के नए सिरे से जांच के आदेश के बाद फिर से चर्चा में आ गया है. देश की सबसे बड़ी अदालत ने जांच करने वालों को 3 महीने के अंदर दोबारा जांच पूरी करने और अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.

मामला अभी भी अनसुलझा है

पीड़िता के साथ अक्टूबर 2012 में रेप हुआ था और उसकी हत्या कर दी गई थी. इस मामले की जांच पहले कर्नाटक क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) और बाद में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने की थी. हालांकि आखिर में किसी भी दोषी को सजा नहीं मिली.

---विज्ञापन---

जांच में कमी का आरोप

इस केस में गिरफ्तार किए गए संतोष राव को जून 2023 में CBI की एक स्पेशल कोर्ट ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए बरी कर दिया था. पीड़िता के परिवार का कहना है कि राव को गलत तरीके से फंसाया गया था और उन्होंने पिछली जांच में कमियों का आरोप लगाया था. इसके बाद पीड़िता की मां ने नए सिरे से जांच की मांग की. कर्नाटक हाईकोर्ट ने अगस्त 2024 में उनकी याचिका खारिज कर दी, लेकिन इस संभावना पर कहा कि कोई और शख्स भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है.

2025 के आरोपों ने फिर से ध्यान खींचा

धर्मस्थल इलाके से जुड़े एक पूर्व सफाई कर्मचारी के आरोपों के बाद 2025 में इस मामले ने फिर से लोगों का ध्यान खींचा. उसने दावा किया कि उसे कई शवों को ठिकाने लगाने के लिए मजबूर किया गया था और आरोप लगाया कि कुछ पीड़ितों के शरीर पर यौन उत्पीड़न और हत्या के निशान थे.

---विज्ञापन---

कर्नाटक सरकार ने सामूहिक दफन के आरोपों की जांच के लिए एक स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई. एसआई की जांच पीड़िता मामले से अलग थी; अधिकारियों का कहना था कि पीड़िता मामले को न्यायिक दखल के बिना दोबारा नहीं खोला जा सकता.

फैसले का स्वागत

लंबे समय से नए सिरे से जांच की मांग कर रहे एक्टिविस्ट महेश शेट्टी थिमरोडी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया. ताजा आदेश जांच करने वालों को पीड़िता की मौत से जुड़े सबूतों और हालात की चेक करने और ये तय करने का नया मौका देता है कि इस अपराध के लिए कौन जिम्मेदार था.

---विज्ञापन---