पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते पर खतरा ज्यादा बढ़ गया है. इसका असर भारत के कारोबार पर भी पड़ रहा है. ऐसे मुश्किल समय में भारत के लिए ओमान का सोहर पोर्ट वैकल्पिक रास्ते के तौर पर चर्चा में आया है. यह पोर्ट होर्मुज के हिस्से से बाहर है और यहां से सामान को समुद्र के साथ-साथ सड़क के जरिए खाड़ी के दूसरे देशों तक पहुंचाया जा सकता है.
कहां है सोहर पोर्ट?
सोहर गल्फ ऑफ ओमान के तट पर मौजूद एक बड़ा पोर्ट और इंडस्ट्रियल एरिया है. यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पतले हिस्से से बाहर है. इसलिए अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आने-जाने वाले समुद्री ट्रैफिक में परेशानी हुई, तो सोहर एक वैकल्पिक लॉजिस्टिक पॉइंट हो सकता है. यहां से माल को सड़क के रास्ते UAE और दूसरे खाड़ी देशों तक भेजा जा सकता है. भविष्य में रेल कनेक्टिविटी बढ़ने से यह नेटवर्क और मजबूत हो सकता है.
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भारत के लिए इसकी क्या अहमियत?
एक रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में तनाव के बाद जो माल पहले सीधे खाड़ी देशों तक जाता था, उसका कुछ हिस्सा सोहर पोर्ट पर पहुंचाया जा रहा है. वहां से सड़क से जरिए माल आगे भेजा जा रहा है. सोहर पोर्ट और फ्रीजोन में अब तक 30 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश बताया गया है. पोर्ट की सालाना कार्गो हैंडलिंग क्षमता 7.2 करोड़ टन से ज्यादा की है. 2026 के पहले छह महीनों में इसके कंटेनर ट्रैफिक में करीब 40% की बढ़ोतरी भी दर्ज की गई.
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सामान के साथ-साथ तेल के लिए भी अहम सोहर पोर्ट
सोहर का काम सिर्फ कंटेनर और दूसरे सामानों के लाना- ले जाना तक सीमित नहीं है. रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब भी सोहर के पास शिप-टू-शिप ट्रांसफर के जरिए कच्चे तेल की आवाजाही कर रहा है. सितंबर और अक्टूबर में करीब 6 करोड़ बैरल कच्चे तेल को इसी तरीके से भेजने की योजना बताई गई. भारत के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि भारत पहले ही ओमान से कच्चा तेल और बाकी सामान आयात करता है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 2024-25 में भारत-ओमान व्यापार में ऊर्जा और इंडस्ट्रियल सामानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
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क्या होर्मुज की जगह ले सकता है सोहर?
सोहर को दूसरा होर्मुज या पूरा विकल्प कहना सही नहीं है. दोनों की क्षमता और भूमिका अलग-अलग है. लेकिन हां, संकट के समय सोहर भारत के लिए मददगार एवं एक रास्ता जरूर देता है. अभी समुद्र, सड़क और भविष्य में रेल की कनेक्टिविटी के जरिए यह भारत और खाड़ी बाजारों के बीच सप्लाई चेन को मदद दे सकता है. यही वजह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तनाव में सोहर की अहमियत सिर्फ एक पोर्ट की नहीं, बल्कि भारत के लिए सप्लाई चेन को ज्यादा बढ़ाने के रूप में बढ़ रही है.
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