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डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवरों को मिलेगा हेल्थ इंश्योरेंस और एक्सीडेंट क्लेम; जानें क्या है ESIC स्कीम, जिसे लॉन्च करने की तैयारी

देश में गिग इकॉनामी से जुड़े लाखों वर्कर्स के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) अब गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी अपने सोशल सिक्योरिटी दायरे में लाने की योजना बना रही है. अगर यह योजना लागू होती है तो फूड डिलीवरी पार्टनर, कैब ड्राइवर, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले फ्रीलांसर और अन्य गिग वर्कर्स को भी स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा.

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देश में गिग इकॉनामी से जुड़े लाखों वर्कर्स के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) अब गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी अपने सोशल सिक्योरिटी दायरे में लाने की योजना बना रही है. अगर यह योजना लागू होती है तो फूड डिलीवरी पार्टनर, कैब ड्राइवर, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले फ्रीलांसर और अन्य गिग वर्कर्स को भी स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा.

क्या है ESIC की यह योजना?

देश के लाखों गिग वर्कर्स को भी अन्य क्षेत्रों में काम कर रहे कर्मचारियों की तरह ही सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सके, इसके लिए ही सरकार और ESIC काम कर रहे हैं. इस योजना के तहत कर्मचारियों को इलाज की सुविधा, मातृत्व लाभ, दुर्घटना बीमा और अन्य जरूरी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का फायदा गिग वर्कर्स को भी मिलेगा. वहीं, इस योजना के लिए गिग वर्कर्स का डेटा जुटाने और उन्हें एक व्यवस्थित सिस्टम से जोड़ने का भी काम किया जा रहा है. माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया में ई-श्रम पोर्टल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि पात्र कर्मचारियों की पहचान आसानी से की जा सके.

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कंपनियों और सरकार के बीच होगी डील

इस योजना को लागू करने के लिए सरकार, ESIC और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों के बीच समन्वय बनाया जाएगा. प्लेटफॉर्म कंपनियों के डेटा और ई-श्रम पोर्टल के जरिए कर्मचारियों का पंजीकरण किया जा सकता है, जिससे लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंच सके.

तेजी से बढ़ रही गिग इकोनॉमी

भारत में ऑनलाइन फूड डिलीवरी, ई-कॉर्मस, कैब सर्विस और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ गिग वर्कर्स की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. इस समय देश में करीब 1 करोड़ गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स काम कर रहे हैं और आने वाले सालों में यह संख्या 2.5 करोड़ तक भी पहुंच सकती है. जिसका अनुमान जताया गया है. इसी बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार इस क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का मजबूत ढांचा तैयार करना चाहती है.

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शामिल हैं कई चुनौतियां

इस योजना को लागू करने के लिए अभी भी कई मुद्दों पर चर्चा और फैसले होना बाकी है. इसमें यह भी तय करना होगा कि कौन-कौन से गिग वर्कर्स इस योजना के दायरे में आएंगे, फंडिंग की व्यवस्था कैसे होगी और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले कर्मचारियों को किस तरह इसका लाभ दिया जाएगा.

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First published on: Jun 27, 2026 12:25 PM

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About the Author

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.

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